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Author: Sana Siddique

हम सब प्यारे नबी (स.) की उम्मत हैं। आप (स.) की तालीम हमारी विरासत है। उनकी ज़िंदगी में हमारे लिए बेहतरीन नमूना है। उनके उम्मती होने के सबब से हमें आप (स.) की तालीम पर अमल करना है, उनके दिखाए हुए रास्ते पर चलना है। आपकी जिंदगी का हर पहलू रहमत से लबरेज़ है। लेकिन कितने दुःख की बात है कि, आज उनके मानने वालों के बीच, उनके उम्मती होने का दावा करने वालों के बीच हमें रहमत का मंज़र देखने को नहीं मिलता। ऐसा

आपका है रहम-ओ-करम.. आपसे है रोशन ये जहां; ऐ रसूल-ए-ख़ुदा! लाखों दिलों में है आपका बसेरा। माह-ए-रबी उल अव्वल का था वो मुबारक दिन, जहां में तशरीफ़ लाए आप जिस दिन! करने हमारी रहनुमाई हर पल हर दिन। यतीमों के दुःख-दर्द को जाना आपने, अपना बचपन यतीमी में गुज़ारा आपने। सिर पर बाप का साया ना पाया आपने.. छह बरस की उमर में मां को खोया आपने, आठ बरस के हुए, तो दादा अब्दुल मुत्तलिब  भी गुज़र गए.. आप इस भरी दुनिया में तन्हा रह गए! इन कड़वे लम्हों को भी मुस्कुराकर गुज़ारा आपने, रहमत, दरियादिली और अपनापन

2015 में फ़्रैंच की उपहासपूर्ण मैग्ज़ीन चार्ली हेब्डो में, एक भद्दा कार्टून छापा गया, बेहूदा तस्वीर, एक घिनौनी मुस्कान, और हौलनाक मंज़र रचाया गया। जिसे मेरे नबी मोहम्मद स. का किरदार बताया गया। दुनिया भर के मुसलमानों को उकसाया गया, उन्होंने इस पर ऐतराज़ जताया - कुछ ने तो चार्ली हेब्डो के ऑफिस को जलाया, कितने ही मासूमों ने अपना सब कुछ गंवाया। एक बार फिर हमने अपने नबी स. का मज़ाक उड़ाया। वह कार्टून चार्ली हेब्डो से हम मुसलमानों ने ही बनवाया। Click here to sign the

जिस समाज में छोटी सी भी आपदा के आने पर मृत्यु जीवन की अपेक्षा अधिक आमंत्रित लगे, उन विकट परिस्थितियों में जन्म से अनाथ होने के उपरांत भी उसकी आस्था की किरण मंद नहीं हुई वह तो स्वंय प्रकाश की उस उज्जवल किरण के रूप में आया था जिसने लाखों लोगों के हृदय को पृकाशित कर दिया। जिसकी अतुलनीय दयालुता एवं सहनशीलता इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखी जाती है, जो इस विश्व का अत्याधिक प्रभावशाली व्यक्ति गुज़रा, वह कौन है? आह! और भी दुखद

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